नई शिक्षा निति 2022 क्या है ?

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सबसे पहले आपको इस बात पर ध्यान देना चाहिए की “शिक्षा “क्या है शिक्षा का मतलब यह है कि “सिखाने एंव सिखाने की क्रिया” और अगर इसका व्यापक रूप समझे तो शिक्षा किसी भी समाज /समुदाय में निरन्तर बढ़ने वाली एक प्रकिया है जो मानव को उसका लक्ष्य प्राप्ति में मदद करती है साथ ही मानव की भीतरी शक्तियों का विकास तथा उसके जीवन में व्यवहार को मजबुत बनाती है , उसके ज्ञानग्राही एंव कौशल में वृध्दि कर मानव को एक जिम्मेदार नागरिक बनाया जाता है | अब नई शिक्षा निति 2022 आई है | नई शिक्षा निति 2022 इस प्रकार है

महत्वपूर्ण सारणी-

पोस्ट किसके बारे में है नई शिक्षा निति 2022
NEW EDUCATION POLICY 2022
प्रारम्भ की गई शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निसंक
मंत्रालयशिक्षा मंत्रालय/
मानव संसाधन मंत्रालय ( पुराना नाम )
आरम्भ की गई 2021-22
योजना लाभार्थी भारत के नागरिक
लक्ष्यशिक्षा के ज्ञानग्राही एंव कौशल में वृध्दि, अच्छी गुणवत्ता,
उद्देश्य 2030 तक सभी स्कूलीशिक्षा में 100% GER का लक्ष्य,
योजना शुरू भारत सरकार द्वारा
शिक्षा मंत्रालय वेबसाइट https://www.education.gov.in/en

नई शिक्षा निति 2022 का उद्देश्य

  • पुरानी राष्ट्रीय शिक्षा नीति 1986 में बनाई गई थी जिसमें सन् 1992 में बदलाव किया गया था। वर्तमान राष्ट्रीय शिक्षा नीति अंतरिक्ष वैज्ञानिक के. कस्तूरीरंगन की अध्यक्षता वाली समिति की रिपोर्ट पर आधारित है।
  • नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2022 के तहत सन् 2030 तक कुल नामांकन अनुपात (Gross Enrollment Ratio-GER) को 100% लाने का उद्देश्य रखा गया है।
  • New Education Policy के मध्य केंद्र व राज्य सरकार के मदद से शिक्षा क्षेत्र पर GDP के 6% भाग के सार्वजनिक खर्च का उद्देश्य रखा गया है।
  • नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति की घोषणा के साथ ही मानव संसाधन प्रबंधन मंत्रालय का नाम बदल कर शिक्षा मंत्रालय कर दिया गया है।
नई राष्ट्रीय शिक्षा निति 2022
नई राष्ट्रीय शिक्षा निति 2022

पुरानी/पूर्व शिक्षा निति में बदलाव की आवश्यकता क्यों

  • वैश्विक परिदृश्य में ज्ञान आधरित अर्थव्यवस्था की माँगो को पूरा करने के लिये वर्तमान शिक्षा नीति में बदलाव की आवश्यकता थी।
  • नवाचर और अनुसंधान को बढ़ावा, अच्छी शिक्षा की गुणवत्ता को बढ़ावा देने के लिए नई शिक्षा निति की आवश्यकता थी |
  • भारतीय शिक्षा की व्यवस्था के भागों सुनिश्चित करने के वैश्विक मानको को अपनाने के लिए शिक्षा निति में बदलाव की आवश्यकता थी |

नई राष्ट्रीय शिक्षा निति से संबंधित बाध्ये

  • राज्यों की सहायता :- शिक्षा एक समवर्ती सूची में जिसमे राज्यों का अधिकार होता है, इस लिए अपने अपने राज्यों के अपने स्कुल बोर्ड है तो केन्द्रीय सरकार नई शिक्षा निति लागु करती है राज्यों को आगे आना होगा | यदि नियंत्रण संगठन के तौर पर एक राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा नियम समिति को लाने संम्बधी विचार का राज्यों द्वारा विरोध हो सकता है |
  • महंगी /पूंजी शिक्षा :- नई शिक्षा निति में राष्ट्र के बाहर विदेशी विश्वविद्यालय में प्रवेश का मार्ग अच्छा किया गया है विभिन्न शिक्षा विदो का मानना है कि विदेशी विश्वविद्यालय में प्रवेश से भारतीय शिक्षण व्यवस्था के महंगी होने की संभावना है| इसके परिणाम से कमजोर वर्ग के छात्रों के उच्च शिक्षा मिलाना और कठिन हो जायेगा और अधिक समस्याओं का समाना करना पड़ेगा |
  • फंडिग संम्बधी जाँच का अपर्याप्त होना :- कुछ राज्यों में आज भी शिक्षा के शुल्क संम्बधी विनिमय चालू है| पर ये शिक्षा निति असीमित दान – पुण्य के रूप में लाभकारी पर प्रतिबन्ध लगाने में असफल है |
  • खर्च /वित्तपोषण :- वित्तपोषण का सुनिश्चित होना इस बात पर निर्भर करेगा कि शिक्षा पर सार्वजनिक खर्च के रूप में GDP के व्यय करने की अपने शक्ति अनुसार कितनी सशक्त है|
  • शिक्षक की कमी :- वर्तमान में शिक्षा के क्षेत्र में कुशल शिक्षको की कमी है, तो इस समय नई शिक्षा निति लागु करने पर व्यवस्था के सुचारू रूप से लागु करने में समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है |

Important Point

पुरानी राष्ट्रीय शिक्षा नीति 1986 में बनाई गई थी जिसमें सन् 1992 में बदलाव किया गया था।
वर्तमान राष्ट्रीय शिक्षा नीति अंतरिक्ष वैज्ञानिक के. कस्तूरीरंगन की अध्यक्षता वाली समिति की रिपोर्ट पर आधारित है।
नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 के तहत सन् 2030 तक कुल नामांकन अनुपात (Gross Eurolment Ratio-GER) को 100% लाने का उद्देश्य रखा गया है।
New Education Policy के मध्य केंद्र व राज्य सरकार के मदद से शिक्षा क्षेत्र पर GDP के 6% भाग के सार्वजनिक खर्च का उद्देश्य रखा गया है।
New Education Policy की घोषणा के साथ ही मानव संसाधन प्रबंधन मंत्रालय का नाम बदल कर शिक्षा मंत्रालय कर दिया गया है।

नई राष्ट्रीय शिक्षा निति के महत्वपूर्ण बिंदु

स्कूली शिक्षा संबंधी नियम :-

  • New Education Policy में 5 + 3 + 3 + 4 Design वाले शैक्षणिक संरचना का प्रस्ताव किया गया है जो 3 से 18 वर्ष की आयु वाले बच्चों को शामिल करता है।
  • 5 वर्ष की फाउंडेशनल चरण (Foundational Stage) – 3 साल का प्री-प्राइमरी स्कूल और श्रेणी 1, 2
  • 3 वर्ष का प्री-पेट्रेरी चरण (Prepatratory Stage)
  • 3 वर्ष का मध्य (या उच्च प्राथमिक) चरण – श्रेणी 6, 7, 8 और
  • 4 वर्ष का उच (या माध्यमिक) चरण – श्रेणी 9, 10, 11, 12
  • New Education Policy 2020 के तहत HHRO द्वारा ‘बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मक ज्ञान पर एक राष्ट्रीय मिशन’ (National Mission on Foundational Literacy and Numeracy) की स्थापना का प्रस्ताव किया गया है।
  1. फाउंडेशन स्टेज :- इस स्टेज में 3 से 8 साल तक के बच्चो को शामिल किया जाएगा | इस आयु के बच्चे प्री-प्राइमरी स्कूल में शिक्षा दी जाएगी, इसके अंतर्गत श्रेणी 1, 2 है| इस वर्ग के आयु के बच्चो को भाषा कौशल तथा शैक्षिक स्तर तथा साथ ही इनके ध्यान को केन्द्रित किया जायेगा |
  1. प्रीपेटरी स्टेज :- इस स्टेज में 9 से 11 साल के बच्चो को शामिल किया जाएगा | इस आयु वर्ग में 3 से कक्षा 5 तक के छात्र होंगे | इनको संख्यात्मक कौशल, साथ ही क्षेत्रीय भाषा का बोध कराया जायेगा इनको अपने मन को एकाग्रता करने की कला सिखाई जायगी |
  1. मिडिल स्टेज :-इस स्टेज के अन्दर कक्षा 6 से कक्षा 8 तक छात्र को शामिल किया जाएगा | इस में छात्र को कंप्यूटर प्रोग्रमिंग के साथ कोडिंग सिखाई जाएगी तहत वेब डिजाइनिंग, टेलीकम्युनिकेशन, हेल्थ केयर, फोटोग्राफी, गेम डिजाइनिंग, इवेंट मैनेजमेंट, टूरिज्म, कंप्यूटर साइंस, हाउस कीपिंग ऑफिस मैनेजमेंट आदि कोर्स किए जा सकते हैं जिससे उनको व्यवसाय में काम के भागीदारी मिल सके, व्यवसाय इंटर्नशिप प्रदान की जायेगीं |
  1. सेकेंडरी स्टेज : –इस स्टेज में कक्षा 9 से कक्षा 12 तक के विधार्थी को शामिल किया जाएगा इस सेकण्डरी स्टेज में विधार्थीयों को अपनी शैक्षिक पाठ्यक्रम पूरा कर के अपनी आगामी बहु वैकल्पिक शैक्षिक पाठ्यक्रम को नई शिक्षा निति के अंतर्गत विधार्थी अपने अनुसार विषय का चयन कर के अपने साइंस के विषयों,आर्ट्स या कॉमर्स के विषय का अध्यन कर सकता साथ ही अपने विषय के बारे में अधिक रूचि के लिए भारत सरकार द्वारा अनेक अभियान चलायें गये है |

क्या क्या बदलाव होंगे स्कूली शिक्षा में ?

नई शिक्षा नीति के अंदर इस प्रकार बदलाव किया गया है –

  • प्रगति कार्ड में जीवन को कैसे जीना है इसे शामिल किया गया है |
  • छात्रो के लिए कंप्यूटर प्रोग्रामिंग कोर्स के साथ कोडिंग शामिल किये गये है ।
  • मिडिल स्टेग से छात्रो की पदाई पर अधिक ध्यान दिया जायेगा ।
  • प्री-पेट्रेरी स्टेग में छात्रो को अपने शिक्षा के स्तर को मजबूत किया जायेगा ।
  • राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा तैयार करगा जिसमे परीक्षा के 2 भाग होंगे ।
  • NCERT की और से आधारभूत साक्षरता और संख्यात्मकता जेसा मिशन शुरू किया जायेगा |

क्या क्या बदलाव होंगे उच्च शिक्षा में ?

उच्च शिक्षा में अधिक बदलाव किये गये है जो निम्म लिखित है –

  • इस शिक्षा मे ई-कोर्सेस की शिक्षा 8 क्षेत्रीय भाषा में ग्रहण कर सकते है |
  • मॉनिटरिंग मूल्यांकन और प्रशिक्षण के राष्ट्रीय मिशन शुरू किये जायेंगे |
  • उच्च शिक्षा के एक नियम कानून के लिए एक बोर्ड की स्थापना की जायगी |
  • सभी सरकारी स्कुलो में और निजी संस्थानों में सामान मानक होगा |
  • नई शिक्षा निति के मध्य स्नातक पाठ्य विवरण में Multiple Entry And Exit व्यवस्था को अपनाया गया है |
  • इसके मध्य 3 या 4 वर्ष के स्नातक कार्यक्रम में विधार्थी कई स्तरों पर पाठ्य विवरण को छोड़ सकेंगे और उन्हें उसी के अनुरूप Degree या प्रमाण-पत्र दिया जाएगा |
  • 1 वर्ष के बाद प्रमाण-पत्र, 2 वर्षों के बाद एडवांस डिप्लोमा, 3 वर्षों के बाद स्नातक की Degree तथा 4 वर्षों के बाद शोध के साथ स्नातक |
  • इस के मध्य M.Phil कार्य-क्रम को हटा दिया गया |

सरकार ने हायर एजुकेशन कमीशन ऑफ इंडिया (HECI)के कार्यों के मजबुत कार्य हेतु चार संस्थान

  • राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा नियामकीय समिति (National Higher Education Regulatory Committee-NHERC) : यह शिक्षक शिक्षा के साथ उच्च शिक्षा क्षेत्र के लिये एक नियम बनाने का कार्य करेगा।
  • सामान्य शिक्षा समिति (General Education Council – GEC) : यह उच्च शिक्षा कार्यक्रमों के लिये अच्छा सीखने के लिए कार्य करेगा|
  • राष्ट्रीय प्रत्यायन समिति (National Accreditation Council – NAC) : यह स्कूल के लिए कार्य करेगा जो मुख्य रूप से बुनियादी ढाचो के मानदंडों, सार्वजनिक स्व-प्रकटीकरण, सुशासन और परिणामों के साथ साथ उसके उद्देश्य पर आधारित होगा।
  • उच्चतर शिक्षा अनुदान समिति (Higher Education Grants Council – HGFC) : -यह निकाय कॉलेजों एवं विश्वविधालय के लिए उनके लिए व्यय का निर्धारण के लिए कार्य करेगा|

पाठ्य विवरण तथा आकलन संबंधी सुधार

  • परख’ (PARAKH) :-विधार्थी की प्रगति कार्ड के आकलन के लिये मानक-निर्धारक समुदाय के रूप में एक नए ‘राष्ट्रीय आकलन केंद्र’ (National Assessment Centre) की स्थापना की जाएगी।
  • ‘राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद’ (National Council of Educational Research and Training- NCERT) द्वारा ‘स्कूली शिक्षा के लिये राष्ट्रीय पाठ्य विवरण रूपरेखा’ (National Curricular Framework for School Education) तैयार की जाएगी।
  • विधार्थी के सामने विकास के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए कक्षा-10 और कक्षा-12 की परीक्षाओं में परिवर्तन किया जाएगा।
  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता’ (Artificial Intelligence- AI) :- विधार्थी की प्रगति के आकलन तथा विधार्थी को अपने भविष्य से जुड़े निर्णय लेने में सहायता प्रदान करने के लिये Software का प्रयोग करेंगे।
  • इस नीति में प्रस्तावित सुधारों के अनुसार,Arts और Science, Professional तथा शैक्षणिक विषयों एवं पाठ्य विवरण व पाठ्येतर गतिविधियों के बीच बहुत अधिक अंतर नहीं होगा।
  • कक्षा-6 से ही शैक्षिक पाठ्य विवरण में Professional Study को शामिलत कर दिया जाएगा और इसके मध्य इंटर्नशिप (Internship) की व्यवस्था भी की जाएगी।

भारतीय उच्च शिक्षा आयोग से संबंधित कार्यक्रम

  • NEW EDUCATION POLICY में देश भर के उच्च शिक्षा स्कूल के लिये एक एकल नियामक अर्थात् भारतीय उच्च शिक्षा परिषद (Higher Education Commision of India-HECI) की परिकल्पना की गई हैजिसमें विभिन्न भूमिकाओं को पूरा करने हेतु कई कार्यक्षेत्र होंगे।
  • भारतीय उच्च शिक्षा आयोग चिकित्सा एवं कानूनी शिक्षा को छोड़कर पूरे उच्च शिक्षा क्षेत्र के लिये एक एकल निकाय (Single Umbrella Body) के रूप में कार्य करेगा।
  • विशेष शैक्षिक क्षेत्र :- महत्वकांक्षी जिले जैसे जहाँ अधिक संख्या में जातिगत की समस्या, सामजिक से पिछड़े, आर्थिक बाधाओ का सामना करने वाले छात्र पाए जाते है, उन्हें  इस क्षेत्र के रूप में रखा जाता है|
  • जेंडर इंक्लूजन फंड  (Gender Inclusion Fund):- सेंटर में लड़ियों और ट्रांसजेंडर छात्रों की बराबर की शिक्षा प्रधान की जाएगी, इसमे कोई भी भेद भाव नही होगा |
  • NCRTE के द्वारा :- ये संस्था 8 वर्ष के तक के छात्रों के शुरआती बचपन की देखभाल और पढ़ाई हेतु एक राष्ट्रीय पाठ्यक्रम के साथ-साथ ही उनके शैक्षणिक परिषद का निर्माण करेंगे |

शिक्षक के पदोंन्नति/शिक्षण व्यवस्था में सुधार –

  • अध्यापक के लिए एक राष्ट्रीय व्यावसायिक परिषद का निर्माण किया जाएगा इस का निर्माण राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद के तहत वर्ष 2022 में किया जाएगा |
  • NCERT के निर्देश के द्वारा एक अध्यापक की शिक्षा के लिए “नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क फ़ॉर टीचर एजुकेशन -NCFTE ” की स्थापना की जाएगी जिसमे अधयापक की शिक्षा कराई जाएगी |
  • अधयापक के पदोंन्नति को अधिक प्रभावी और पारदर्शक परीक्षाओं का पालन किया जायेगा तथा समय समय पर उनके कार्यो का कक्रियान्वयन भी होगा |
  • अब अध्यापक/अध्यापन के लिए कम से कम न्यूनतम शिक्षा की डिग्री की योग्यता 4-वर्षीय एकीकृत B.ed डिग्री का होना आवश्यक होगा इस मतलब ये की आपको किसी भी विषय में कॉलेज की 3 वर्षीय डिग्री के साथ 1 वर्षीय बी.एड. की डिग्री होना चाहिए 

डिजिटल शिक्षा के प्रावधान –

  • राष्ट्रीय शैक्षिक प्रौधोगिकी मंच (national education technol foruem ) :- इस मंच के तहत शिक्षण, मूल्यांकन योजना एंव शिक्षा के प्रशासन के विचारो का आदान प्रदान किये जाएंगे
  • शिक्षा के संसाधन के उपकरण में सुधार, उनके क्षमताओ तथा उनके बुनियाद ढ़ाचे को सुधारेंगे जिस से उनके कार्य करने की क्षमता में व्रद्धि होगी |
  • इस नई शिक्षा निति में वोकेशनल पढ़ाई पर मुख्य फोकस किया गया है जो वर्ष 2025 तक वोकेशनल पढ़ाई का प्रतिशत अंक 50% करने का लक्ष्य रखा है इस वोकेशनल पढ़ाई में छात्रों को लकड़ी से कोई उपकरण बना, मिट्टी से बर्तन, बिजल का उत्पादन करना, कृषि कैसे करना आदि इस प्रकार की पढ़ाई कराई जाएगी

बच्चो के लिए सुविधा –

  • एल.केजी और यू.केजी:- इस कक्षा के बच्चो को केवल स्कूल में ही एल्फाबेट,संख्या,व्यंजनों को पहचान ओर बोलना बतया जाएगा इनको कोई भी कार्य नही दिया जाएगा
  • पहली और दूसरी कक्षा :- इस कक्षा के बच्चो को केवल स्कूल में ही एल्फाबेट,संख्या,व्यंजनों को बोलना ओर लिखाना सिखाया जाएगा इनका उपयोग कर के शब्द बनाना, इन सभी को स्कूल कार्य और ग्रह कार्य दोनो मिला कर 1 घंटे का कार्य दिया जाएगा |
  • तीसरी से पाँचवी कक्षा :-इस कक्षा के बच्चो को अंग्रेजी,गणित और हिंदी का ज्ञान दिया जायेगा ये ज्ञान उनकी मातृभाषा में दिया जयेगा इनको घर के ग्रह कार्य 1 घंटे का दिया जायेगा
  • कक्षा 6 से 8वीं :-  इस कक्षा के बच्चो को 2 घंटे का ग्रह कार्य दिया जयेगा इन बच्चों वोकेशनल कार्य भी करवाया जाएगा |
  • कक्षा 9 से 12वीं :-  इस कक्षा के बच्चो को 3 घंटे का ग्रह कार्य दिया जयेगा
  • सभी छात्रों के स्कूल के बैंग का वजन उस छात्र के वजन का 10% या इस से कम होगा
  • स्कूल की सभी किताबो का वजन छात्रो को चयन के अनुसार बनाया जाएगा
  • स्कूल के बच्चो का आकलन के लिए सबसे पहले खुद करेगा, दूसरा उसके सहपाठियों , तीसरा शिक्षक ओर फिर   उसका समाज करेगा, अंतिम चरण में भारत के नागरिक करेंगे |

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने राष्ट्रीय शिक्षा निति पर क्या कहाँ –

  • P.M. ने कहा की इस निति के तहत छात्रों को एक सभ्यता नागरिक साथ ही उसे अपने सभ्यता से जोड़ेंगे इस से अपने राष्ट्र के प्रति एक काबिल नागरिक बनाना है |
  • छात्रो को अपने विचारो पर कार्य करने की छूट होगी जिस से अपने पैशन को उच्च स्तर पर लेन के लिए अपने पैशन को फॉलो करंगे |
  • P.M. ने कहा की छात्रो को उनकी रुचिकर कार्य, अपने मांग की डिजाइन, ओर अधिक क्षमता के साथ कार्य करना |
  • इस निति के तहत छात्रों को अपने कार्य के प्रति ध्यान केंद्रित करना सीखेंगे जिस से उनकी एकग्रता में व्रद्धि होंगी |
  • इस शिक्षा निति को सुचारू रुप से चलाने के लिए एक शिक्षा विभाग का योगदान होना चाहिए क्योंकि इस विभाग के शिक्षकों को अच्छा प्रशिक्षण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा |

छात्रों को छात्रवृत्ति सहायता

इस राष्ट्रीय शिक्षा निति के तहत राष्ट्रीय छात्रवृत्ति विभाग बनाया जाएगा जिस से छात्रों को वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी साथ ही निजी संस्थान में छात्रों को वित्तीय सहायता दी जायगी जिस से छात्रों को अपने अध्ययन में प्रगति मिल सके |

नई शिक्षा निति 2022
नई शिक्षा निति 2022

राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 1986

  • ग्रामीण भारत में जमीनी स्तर पर आर्थिक और सामाजिक विकास को बढ़ावा देने के लिये महात्मा गांधी के दर्शन पर आधारित “ग्रामीण विश्वविद्यालय” मॉडल के निर्माण के लिये नीति का अवागमन किया गया।
  • इस नीति का उद्देश्य विभिन्नताओं को दूर करने विशेष रूप से भारतीय औरतों, अनुसूचित जनजातियों और अनुसूचित जाति समुदायों के लिये शैक्षिक अवसर की समान करने पर विशेष ज़ोर देना था।
  • ओपन यूनिवर्सिटी:- इस नीति ने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय के साथ प्रणाली का विस्तार किया।
  • ऑपरेशन ब्लैकबोर्ड ;- इस नीति ने प्राथमिक स्कूलों को सुधारने के लिये लॉन्च किया।
इस पोस्ट का निष्कर्ष

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 21वीं सदी के भारत की जरूरतों को पूरा करने के लिये भारतीय शिक्षा प्रणाली में बदलाव हेतु जिस नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 को मंज़ूरी दी है अगर उसका सुचारू रूप से लागु करने में सफल तरीके से होता है तो यह नई प्रणाली भारत को विश्व के अग्रणी देशों के बराबर ले आएगी। नई शिक्षा नीति, 2020 के तहत 3 साल से 18 साल तक के बच्चों को शिक्षा का अधिकार कानून, 2009 के मध्य रखा गया है। 34 वर्षों के बाद आई इस नई शिक्षा नीति का उद्देश्य सभी छात्रों को उच्च शिक्षा उपलब्ध करना है जिसका लक्ष्य 2025 तक पूर्व-प्राथमिक शिक्षा (3-6 वर्ष की आयु सीमा) को सार्वभौमिक बनाना है। स्नातक शिक्षा में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस, थ्री-डी मशीन, डेटा-विश्लेषण, जैवप्रौद्योगिकी आदि क्षेत्रों के समावेशन से अत्याधुनिक क्षेत्रों में भी कुशल युवाओं तैयार होंगे और युवाओं की रोजगार क्षमता में वृद्धि होगी |

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